Breaking News

राज्य में कोरोना संक्रमण से अब तक 110 लोगों की मौत, पूरे देश में 42% लोगों की जान यहीं गई

महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा 1500 से ज्यादा है। राज्य के 36 में से 22 जिलों तक कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। राज्य में संक्रमण से 110 मौतें हो चुकी हैं।
महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा 1500 से ज्यादा है। राज्य के 36 में से 22 जिलों तक कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। राज्य में संक्रमण से 110 मौतें हो चुकी हैं।

  • सिर्फ मुंबई में 74 लोगों की जान गई, यानी प्रदेश में हुई मौतों का 70%
  • देश में मौतों का आंकड़ा 255 हुआ; महाराष्ट्र में मुंबई के बाद सबसे ज्यादा मौतें पुणे में

मुंबई. महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत का आंकड़ा 100 पार कर गया। शुक्रवार को मुंबई में 12 लोगों की मौत हुई। इसी के साथ राज्य में मौतों का आंकड़ा 110 हो गया। वहीं, राज्य में संक्रमितों की संख्या 1574 तक पहुंच गई है। राज्य में संक्रमण से पहली मौत 17 मार्च को हुई थी। लेकिन दो अप्रैल के बाद मौत के आंकड़ों में बेहद तेजी रही। जहां 17 मार्च से एक अप्रैल तक यानी 14 दिन में संक्रमण से 13 लोगों की मौत हुई। वहीं, दो अप्रैल से 10 अप्रैल यानी 9 दिनों में 98 लोगों की जान गई।

देश के संक्रमण में महाराष्ट्र की स्थिति-
देश में संक्रमण के करीब सात हजार मामले हैं। वहीं, महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा 1500 से ज्यादा है। यानी हर पांचवां मरीज महाराष्ट्र से है। राज्य के 36 में से 22 जिलों तक कोरोना का संक्रमण फैल चुका है।
देश में मौत का आंकड़ा 255 है। महाराष्ट्र में 108 मौत हो चुकी है। यानी हर 10 में चार मौत महाराष्ट्र में हुई है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौत मुंबई और पुणे में हुई है। मुंबई में अब तक 74 जबकि पुणे में 25 की मौत हो चुकी है।

देश के 20% संक्रमित महाराष्ट्र में
देश के कुल संक्रमित मामलों में करीब 20% जबकि कुल मौतों में से 42% मामले महाराष्ट्र के हैं। राज्य में कोरोना संक्रमितों की मृत्युदर (सीएफआर) 7.11% है जबकि देश में यह 3.10% है। हालांकि, मृत्यु दर के मामले में महाराष्ट्र, पंजाब और गुजरात से पीछे है। यहां क्रमशः 7.92 और 7.69% मृत्यु दर रही है। वहीं सबसे खास यह है कि केरल, जहां कोरोना का पहला मामला सामने आया वहां अब तक सिर्फ 2 मौतें हुई और वहां मृत्यु दर सिर्फ 0.56% है।

पुणे में तेजी से बढ़ा मृतकों का आकंड़ा, सिर्फ दो दिन में हुई 18 मौतें
राज्य में हुई 108 मौतों में से 74 यानि की तकरीबन 70% मौतें मुंबई में हुई हैं। इसके बाद दूसरा नंबर पुणे का आता है। यहां अब तक 27 लोगों की जान जा चुकी है। खास यह है कि पुणे में मंगलवार के बाद से मृतकों के आकड़ों में तेजी से वृद्धि हुई है। मंगलवार को यहां मृतकों की संख्या सिर्फ 6 थी जो गुरुवार शाम तक बढ़कर 25 हो गई। यानि सिर्फ दो दिन में पुणे में 19 लोगों की मौत हुई है। पुणे में सबसे ज्यादा मौतें ससून हॉस्पिटल और मुंबई में कस्तूरबा हॉस्पिटल में हुईं हैं।

महाराष्ट्र में कब कितनी हुई मौतें

तारीख कितने की हुई मौत
17 मार्च 1
21 मार्च 1
25 मार्च 2
27 मार्च 4
29 मार्च 2
31 मार्च 2
1 अप्रैल 1
2 अप्रैल 7
3 अप्रैल 6
4 अप्रैल 6
5 अप्रैल 13
6 अप्रैल 7
7 अप्रैल 12
8 अप्रैल 16
9 अप्रैल 17

मृतकों में सबसे ज्यादा 62% पुरुष

गुरुवार शाम तक संक्रमितों में 840 यानि 62% पुरुष और 38% महिलाएं महिलाएं हैं। वहीं मृतकों में भी पुरुषों की संख्या सबसे ज्यादा 66 है। प्रतिशत की बात करें तो 68% पुरुष और 32 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। महिलाओं की मृत्यु दर जहां 5.94% है, वहीं पुरुषों की 7.89% है।

21- 30 साल के बीच के लोग ज्यादा हुए संक्रमित
21 से 30 साल के बीच के लोग ज्यादा संक्रमित हुए हैं। डॉक्टर इसका कारण इस उम्र के लोगों का घर से ज्यादा बाहर निकालना मानते हैं। ऐसे में संक्रमण का एक कारण यह भी हो सकता है। वहीं, सबसे कम 91-100 साल के बीच हैं। माना जा सकता है कि इस उम्र के लोग घरों में रहते हैं। ऐसे में संक्रमण से बचे रहे। 33 ऐसे भी मरीज हैं, जिनकी उम्र 1 से 10 साल के बीच है।

उम्र(साल) मरीजों की संख्या
1-10 33
11-20 85
21-30 283
31-40 256
41-50 273
51-60 212
61-70 142
71-80 51
81-90

91-100

16

03

ज्यादा परीक्षण किए जाने के कारण सामने आए ज्यादा मामले
स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के मुताबिक, राज्य में लोगों का ज्यादा से ज्यादा परिक्षण हो रहा है, इसलिए यहां मरीजों की संख्या भी ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मरने वालों में ज्यादातर देरी से हॉस्पिटल पहुंचे। इसलिए कोरोना की पुष्टि के कुछ ही दिनों या घंटों में उनकी मौत हो गई। कुछ मरीज तो ऐसे थे कि जिनमें मृत्यु के बाद कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। फिलहाल कहां चूक रह गई इस मामले की पड़ताल जारी है।

महाराष्ट्र में अधिक मामले मिलने का कारण
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी में चेन्नई के वैज्ञानिक तरुण भटनागर ने कहा, ‘तार्किक व्याख्या यह है कि जितना ज्यादा परीक्षण होगा, उतने अधिक मामले मिलेंगे।’ उन्होंने कहा कि जो राज्य वर्तमान दिशा-निर्देशों के साथ अधिक संख्या में संदिग्ध मामलों का परीक्षण कर रहे हैं, वे अधिक मामले पाएंगे। महाराष्ट्र ने मंगलवार तक 20,877 परीक्षण किए थे, जो भारत के कुल नमूनों का 16.8 प्रतिशत था। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रोफेसर लाइफकोर्स महामारी विज्ञान गिरिधर आर बाबू के विश्लेषण से पता चलता है कि महाराष्ट्र ने प्रति 10 लाख लोगों पर 92.4 परीक्षण किए हैं।

ज्यादा मौतों के लिए यह कारक हैं जिम्मेदार
हेल्थ एक्सपर्ट्स की माने तो ज्यादा मौतों के लिए एक से ज्यादा बीमारी, उम्र, बीमारी की गंभीरता, देर से अस्पताल ले जाना और खराब स्वास्थ्य सुविधांए जिम्मेदार होती हैं। मुंबई में कई मामले अस्पताल से संबंधित संक्रमण के हैं, जिन रोगियों को अन्य बीमारियों के लिए भर्ती कराया गया। बाद में उनकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद संक्रमण स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच फैल रहा। बुधवार की प्रेस वार्ता में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि यदि मामलों का देर से पता चलता है तो यह अधिक संख्या में मौतों में एक भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि मामलों की प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण है।

About admin

Check Also

Crisis, fodder and medicines crisis in Jawaharpur for 6 days, people upset

जवाहरपुर में 6 दिन से राशन, चारा व दवाइयाें का संकट, लोग परेशान

कोरोना वायरस से संक्रमित इस गांव की हालत खराब, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान डेराबस्सी. …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *