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जवाहरपुर में 6 दिन से राशन, चारा व दवाइयाें का संकट, लोग परेशान

Crisis, fodder and medicines crisis in Jawaharpur for 6 days, people upset

  • कोरोना वायरस से संक्रमित इस गांव की हालत खराब, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान

डेराबस्सी. (मनोज राजपूत) जानलेवा कोरोना के सर्वाधिक 32 पॉजिटिव केसों के साथ पंजाब का हॉटस्पॉट बना गांव जवाहरपुर जहां कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहा है, वही यहां राशन, पशु चारा व दवाइयों की किल्लत भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लोगों का यह भी आरोप है कि प्रशासन की सेनेटाइजेशन का काम अभी तक सभी घरों और गलियों तक शुरू नहीं किया गया है। गांव के लोगों में जहां कोरोना का खौफ है, वहीं जरूरी वस्तुओं के वितरण को अपर्याप्त बताते हुए लोगों ने इसमें वांछित सुधार करने की प्रशासन से पुरजोर मांग की है।

जवाहरपुर गांव पुलिस और प्रशासन ने पूरी तरह सील कर रखा है। बीते छह दिनों से गांव राशन, पशुओं के लिए चारा और जरूरी दवाइयों के अलावा घरों की सेनेटाइजेशन के लिए प्रशासन का मोहताज है। गांव के लोगों ने बताया कि यहां की आबादी करीब 4000 है, जिसमें करीब 40 फीसदी आबादी गरीब व कमजोर तबके की है। करीब आधी आबादी घरों में मवेशियों को भी पाले हुए हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने राशन वितरण, हरा चारा, जरूरी दवाइयों और सेनिटाइजेशन का बंदोबस्त किया जिसका काम यहां पंचायत सेक्ट्री व हलका पटवारी और दमकल विभाग के लोग देख रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अभी तक 6 दिनों में 3 दिन पहले राशन की सिर्फ 100 किट भी परिवारों तक नहीं पहुंची है। जिनके पास पहुंची है वहां भी यह राशन लगभग खत्म होने को है जबकि कई जरुरतमंद परिवार इस राशन से वंचित बने हुए हैं। गांव में दुधारू मवेशियों की भारी गिनती को देखते हुए अभी तक भूसा और फीड समेत दाने का बंदोबस्त नहीं हुआ है। छिटपुट जरूरी दवाइयां भी पंचायत सचिव ही दे रहे हैं, जबकि अन्य जरूरी दवाइयों के लिए लोग घरों से बाहर नहीं आ सकते।

सेनेटाइजेशन के लिए फायर ब्रिगेड की अभी तक बड़ी गाड़ियां ही आई हैं, जिनके पाइप बमुश्किल 100 फीट भी नहीं होंगे। यह गाड़ियां गांव की तंग गलियों में घुस नहीं पा रही और इनके पाइप पूरे घरों तक ना पहुंच पाने से काफी तादाद में ऐसे घर और गलियां हैं जिन्हें एक बार भी सेनेटाइज नहीं किया जा सका है।  राशन वितरण को दुरुस्त बनाते हुए हरे चारे के साथ भूसा और फील्ड का बंदोबस्त मुकम्मल किया जाए। वही गांव की डिस्पेंसरी खोल वहां जरूरी दवाइयों का भी इंतजाम किए जाएं। सेनेटाइजेशन मुहिम घर-घर पहुंचाने के लिए छोटी गाड़ियां इस्तेमाल में लाई जाएं। यदि गांव के ही कुछ लोगों को मंजूरी दी जाए तो वह सूखा राशन साधन संपन्न घरों से इकट्ठा कर प्रशासन की मदद कर सकते हैं।

गांव में बंद पड़ी डिस्पेंसरी को खोलकर दवाइयां मुहैया कराई जाएं

ग्रामीण…गांव में एक डिस्पेंसरी है जो बंद पड़ी है। डिस्पेंसरी खुलने से लोगों को जहां दवाइयों में राहत मिल सकती है वही भूसा और फीड जानवरों के लिए अत्यंत जरूरी हो गई है। लोगों ने बताया कि हरे चारे की भी सिर्फ एक ट्राली ही 3 दिन पहले आई थी जो नाकाफी रही। उनका यह भी कहना है कि ज्यादातर साधन संपन्न परिवारों के पास गेहूं पिछले साल की स्टोर है।

हालांकि गांव में चार आटा चक्की हैं यदि प्रशासन इनमें से एक दो आटा चक्की को खोलने की परमिशन दे दी जाए तो काफी लोगों को काफी राहत मिल सकती है क्योंकि घरों में पीसे हुए आटे की भी किल्लत होने लगी है। एक समस्या पॉजिटिव और क्वारेंटाइन पीरियड में चल रहे परिवारों की है। इस पीरियड में है उनके यहां मवेशियों की देखभाल भी रामभरोसे हो गई है। घरों से बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा। ऐसे में मवेशियों की देखभाल का जिम्मा कोई दूसरा उठा नहीं पा रहा है।

अभी तक 99 राशन पैकेट व एक ट्राॅली हरा चारा पहुंचा है गांव में
गांव में प्रशासन द्वारा तैनात किए गए पंचायत सचिव जतिंदर सिंह ने बताया कि 3 दिन पहले 99 पैकेट बंद राशन यहां की गरीब और जरूरतमंद आबादी में बांटा गया है। चार लोगों को एक राशन की किट दी गई है जो करीब हफ्ते के लिए काफी रहेगी। इस किट में चावल, दालें, चीनी, चायपत्ती, सरसों का तेल, नमक, मसाले इत्यादि शामिल है। सूखे राशन की अन्य किट प्रशासन द्वारा यहां पहुंचाए जाते ही जरूरतमंद परिवारों को पहुंचा दी जाएगी। राशन पूरी तरह जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है।

फोन करके एक व्यक्ति को गांव के बाहर राशन संग्रह केंद्र पर बुलाया जाता है, उसका आधार कार्ड देख उसके तीन साथियों के लिए नाम नोट कर राशन वितरित किया जा रहा है। हरे चारे की एक ट्राली आई थी जिसे थोड़ा-थोड़ा कर पशुपालकों में वितरित कर दिया गया। उन्होंने माना कि अभी तक भूसा और फीड गांव में नहीं पहुंची है जिसका प्रशासन जल्द ही इंतजाम कर देगा। गांव में चक्की खोलने की मांग को उन्होंने अपने उच्चाधिकारियों तक  पहुंचाने का भरोसा दिया।

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